करियर स्टार्ट करने वालों के लिए खुशखबरी – बढ़ा अप्रेंटिस स्टाइपेंड

करियर स्टार्ट करने वालों के लिए खुशखबरी – बढ़ा अप्रेंटिस स्टाइपेंड

देश के करोड़ों युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। भारत सरकार ने अप्रेंटिसशिप को लेकर अब तक का सबसे बड़ा बदलाव किया है। दरअसल, स्किल डेवलपमेंट एंड इंडस्ट्री मिनिस्ट्री (Skill Development and Entrepreneurship Ministry) ने अप्रेंटिसशिप (Apprenticeship) करने वाले युवाओं के लिए स्टाइपेंड में 80% से ज्यादा की बढ़ोतरी कर दी है। इसके अलावा अप्रेंटिसशिप अधिनियम (Apprenticeship Act) में भी कई अहम सुधार किए गए हैं, जो सीधे तौर पर छात्रों, युवाओं और इंडस्ट्री को फायदा पहुंचाएंगे।

पहले जहां अप्रेंटिसशिप करने वाले युवाओं को मात्र 6800 रुपये महीने का स्टाइपेंड मिलता था, वहीं अब यह बढ़कर 12,300 रुपये कर दिया गया है। यानी अब किसी कंपनी या संस्था में अप्रेंटिसशिप करने वाले युवाओं को लगभग दोगुना स्टाइपेंड मिलेगा।अप्रेंटिसशिप और सरकारी नौकरियोंसे जुड़ी ताज़ा जानकारी यहाँ देखें

आइए विस्तार से जानते हैं सरकार ने क्या-क्या बदलाव किए हैं, इसका युवाओं को क्या फायदा होगा और इंडस्ट्री पर इसका क्या असर पड़ेगा।

अप्रेंटिसशिप क्या है और क्यों है जरूरी?

अप्रेंटिसशिप यानी ट्रेनिंग के दौरान काम सीखना और उसके बदले कंपनियों से स्टाइपेंड पाना। यह युवाओं के लिए सीखते-सीखते कमाने का शानदार अवसर होता है। इसमें कंपनियां छात्रों या युवाओं को एक तय अवधि के लिए अपने यहां ट्रेनिंग पर रखती हैं, ताकि वे प्रैक्टिकल नॉलेज और स्किल हासिल कर सकें। भारत में लंबे समय से यह व्यवस्था मौजूद है, लेकिन अक्सर शिकायत रहती थी कि स्टाइपेंड बहुत कम मिलता है। कई बार तो यह युवाओं के खर्चे तक पूरे नहीं कर पाता था। अब सरकार ने युवाओं की इस समस्या को समझते हुए स्टाइपेंड को बढ़ा दिया है।

कितना बढ़ा स्टाइपेंड?

​​​अभी तक अप्रेंटिसशिप करने वाले युवाओं को 6800 रुपये प्रतिमाह मिलते थे। लेकिन नए नियम के बाद अब उन्हें 12,300 रुपये प्रतिमाह का भुगतान किया जाएगा। यानी लगभग 80% से अधिक की बढ़ोतरी। यह बदलाव युवाओं के लिए काफी राहत लेकर आया है, क्योंकि अब ट्रेनिंग के दौरान भी उन्हें बेहतर आर्थिक सहारा मिल सकेगा।

सरकार का उद्देश्य 

​सरकार का मानना है कि भारत को स्किल्ड नेशन (Skilled Nation) बनाने के लिए अप्रेंटिसशिप को मजबूत करना जरूरी है। युवाओं को रोजगार-योग्य बनाने के लिए सिर्फ डिग्री ही काफी नहीं, बल्कि प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और स्किल्स भी चाहिए। इसी को ध्यान में रखते हुए अप्रेंटिसशिप अधिनियम, 1992 में कई सुधार किए गए हैं।

क्या-क्या हुए बदलाव?

1. अप्रेंटिस स्टाइपेंड में बढ़ोतरी

जैसा कि बताया गया, अब युवाओं को 12,300 रुपये तक का स्टाइपेंड मिलेगा।

2. डिग्री अप्रेंटिसशिप की शुरुआत

स्किल डेवलपमेंट मिनिस्ट्री ने "डिग्री अप्रेंटिसशिप" शुरू करने का फैसला लिया है। इसमें अप्रेंटिसशिप से जुड़े सभी कोर्स शामिल होंगे। यानी अब युवाओं को केवल डिप्लोमा या सर्टिफिकेट नहीं, बल्कि डिग्री लेवल पर भी अप्रेंटिसशिप का अवसर मिलेगा। इससे उन्हें इंडस्ट्री-रेडी बनाने में मदद मिलेगी।

3.वर्चुअल और डिस्टेंस अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग

नए नियमों में अब डिस्टेंस या वर्चुअल मोड से भी अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग की सुविधा दी जाएगी। यह उन युवाओं के लिए खास है जो किसी कारणवश ट्रेवल नहीं कर सकते या छोटे शहरों से आते हैं।

4.उद्योगों का व्यापक कवरेज

पहले अप्रेंटिसशिप का दायरा कुछ खास इंडस्ट्री तक सीमित था। अब इसे बढ़ाकर ज्यादा क्षेत्रों और सेक्टर्स में लागू किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक युवाओं को अवसर मिल सके।

5.क्षेत्रीय बोर्डों का विस्तार

अप्रेंटिसशिप को बेहतर ढंग से लागू करने के लिए सरकार ने क्षेत्रीय स्तर पर बोर्डों का विस्तार करने का निर्णय लिया है। इसका फायदा यह होगा कि छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों के युवाओं तक भी अप्रेंटिसशिप के अवसर पहुंचेंगे।

6.कंपनियां रख सकेंगी 15% तक ट्रेनी

अब कोई भी कंपनी या संस्थान अपनी कुल क्षमता के 2.5% से 15% तक ट्रेनियों की नियुक्ति कर सकती है। पहले यह संख्या सीमित थी। इसमें संविदा कर्मचारी भी शामिल होंगे।

7. 5% पद नए ट्रेनी और सर्टिफिकेट धारकों के लिए रिजर्व

नए नियमों में यह प्रावधान किया गया है कि कुल पदों का कम से कम 5% हिस्सा नए ट्रेनियों और स्किल सर्टिफिकेट प्राप्त युवाओं के लिए रिजर्व होगा। अगर ये पद नहीं भर पाते हैं तो उन्हें अन्य ट्रेनी से भरा जा सकता है।

युवाओं को मिलेगा फायदा

इन बदलावों का सीधा असर युवाओं पर पड़ेगा। पहले जहां कई छात्र कम स्टाइपेंड के कारण अप्रेंटिसशिप करने में दिलचस्पी नहीं दिखाते थे, वहीं अब बेहतर आर्थिक सहारा मिलने पर ज्यादा से ज्यादा युवा इसके लिए तैयार होंगे। इसके अलावा, डिग्री अप्रेंटिसशिप और वर्चुअल ट्रेनिंग जैसी सुविधाओं से अब ग्रामीण और छोटे शहरों के छात्र भी आसानी से जुड़ पाएंगे। लंबे समय में इससे रोजगार के अवसर और स्किल डेवलपमेंट दोनों को बढ़ावा मिलेगा। ​करियर गाइडेंस और अप्रेंटिसशिप पर उपयोगी ब्लॉग्स पढ़ें

इंडस्ट्री को भी होगा लाभ

यह बदलाव केवल युवाओं के लिए ही नहीं, बल्कि इंडस्ट्री के लिए भी फायदेमंद है। कंपनियों को अब ज्यादा संख्या में प्रशिक्षित और स्किल्ड ट्रेनिंग वाले उम्मीदवार मिलेंगे। लंबे समय में यह प्रोडक्टिविटी और क्वालिटी दोनों बढ़ाने में मदद करेगा।

क्यों अहम है यह फैसला?

भारत की आबादी में युवाओं की संख्या सबसे ज्यादा है। लेकिन स्किल गैप (Skill Gap) यानी स्किल की कमी सबसे बड़ी चुनौती है। कई बार छात्र डिग्री तो हासिल कर लेते हैं लेकिन इंडस्ट्री की जरूरतों के मुताबिक उनके पास स्किल नहीं होती। सरकार का यह कदम इस गैप को पाटने की दिशा में अहम है। ज्यादा स्टाइपेंड मिलने से युवाओं की आर्थिक दिक्कतें कम होंगी और वे स्किल ट्रेनिंग पर ज्यादा फोकस कर पाएंगे।

निष्कर्ष

केंद्र सरकार का यह फैसला युवाओं और इंडस्ट्री दोनों के लिए एक बड़ा बदलाव है। स्टाइपेंड में बढ़ोतरी और अप्रेंटिसशिप अधिनियम में सुधार से आने वाले समय में देश में स्किल डेवलपमेंट को नई दिशा मिलेगी।​

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Conclusion

अगर आप पढ़ाई कर रहे हैं या हाल ही में कोर्स पूरा किया है तो अप्रेंटिसशिप आपके करियर के लिए सुनहरा अवसर हो सकता है। बढ़े हुए स्टाइपेंड के साथ अब आपके पास सीखते-सीखते कमाने का मौका है। कोशिश करें कि अपने क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों में अप्रेंटिसशिप करें, ताकि आपको प्रैक्टिकल नॉलेज के साथ-साथ भविष्य में नौकरी पाने में भी आसानी हो।

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